Tantra Mantra Yoga Guru

नासनं सिद्धसदृशं न कुम्भसदृशं बलम्। न खेचरीसमा मुद्रा न नादसदृशो लयः।। सिद्धासन के समान कोई आसन नहीं , कुम्भक के समान कोई बल नहीं , खेचरी के समान कोई मुद्रा नहीं और नाद के समान कोई लय नहीं ।

Saturday, March 08, 2008

हमें एक ऐसा समाज चाहिए जिसमें कन्या भ्रूण हत्या न हो, एक भी बच्चा अशिक्षित न रहे

हमें एक ऐसा समाज चाहिए जिसमें कन्या भ्रूण हत्या न हो, एक भी बच्चा अशिक्षित न रहे ।

1 Comments:

At 1:11 PM, Blogger ASAHI said...

very nice site and good write-ups.
best wishes & regards for you.
:-)

 

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