हमें एक ऐसा समाज चाहिए जिसमें कन्या भ्रूण हत्या न हो, एक भी बच्चा अशिक्षित न रहे
हमें एक ऐसा समाज चाहिए जिसमें कन्या भ्रूण हत्या न हो, एक भी बच्चा अशिक्षित न रहे ।
नासनं सिद्धसदृशं न कुम्भसदृशं बलम्। न खेचरीसमा मुद्रा न नादसदृशो लयः।। सिद्धासन के समान कोई आसन नहीं , कुम्भक के समान कोई बल नहीं , खेचरी के समान कोई मुद्रा नहीं और नाद के समान कोई लय नहीं ।
हमें एक ऐसा समाज चाहिए जिसमें कन्या भ्रूण हत्या न हो, एक भी बच्चा अशिक्षित न रहे ।